• शुक्रवार, नवम्बर 22, 2019
:: उच्चतर शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा शिक्षक और शिक्षण पर पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय मिशन की योजना के अंतर्गत शिक्षक शिक्षण केन्द्र के लिए विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र विभाग को स्वीकृति प्रदान की है |
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नवंबर / दिसंबर सत्रीय परीक्षा 2019 के लिए कर्तव्यों के संबंध में सूचना   
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विद्यापीठ में मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए एहतियाती उपायों के बारे में परिपत्र   
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शास्त्री (प्रथम सेमेस्टर) के लिए पुनः परीक्षा की डेटशीट के संबंध में अधिसूचना   
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अंशकालिक पाठ्यक्रमों के लिए सेमेस्टर परीक्षाओं की डेटशीट के संबंध में अधिसूचना   
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नियमित पाठ्यक्रमों के लिए सेमेस्टर परीक्षाओं की डेटशीट के संबंध में अधिसूचना   
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छात्रवृत्ति परिषद द्वारा छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करने के संबंध में कार्यालय आदेश   
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राष्ट्रीय शिक्षा दिवस उपलक्ष पर व्याख्यान के संबंध में कार्यालय का आदेश
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विद्यापिठ छात्रावास आवास 2018-19 के बारे में अधिसूचना
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संसाधनों के "अनावश्यक अपशिष्ट" को कम करने के संबंध में सूचना
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समयावधि 01 October, 2019 से 30 October, 2019 तक : विद्यावारिधि(पीएच.डी) डिग्री से सम्मानित किया जाने वाले छात्रों की सूची के बारे में अधिसूचना
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छात्रवृत्ति

1. उद्देश्य
  • विद्यापीठ में अध्ययन कर रहे छात्रों को छात्रावत्ति देने का प्रमुख उद्देश्य प्राच्यपद्धति में संस्कृत शिक्षा ग्रहण करने हेतु छात्रों को प्रोत्साहित करना है।
2. छात्रावृत्ति की पात्रता
  • विद्यापीठ में शास्त्री, शास्त्री (सम्मानित) तथा आचार्य कक्षाओं में छात्रवृत्ति पाने के लिए अन्तिम पूर्व उत्तीर्ण परीक्षा में 40 प्रतिशत अंक प्राप्त होना अनिवार्य है। यह नियम शास्त्री एवं आचार्य कक्षाओं के द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के छात्रें पर भी लागू होगा।
  • का विवरण 80 प्रतिशत परम्परागत धारा के छात्रों का तथा 20 प्रतिशत आधुनिक धारा के छात्रों को किया जायेगा। आरक्षित श्रेणी के छात्र अपनी-अपनी धाराओं में ही समाहित होंगे।
  • शिक्षाचार्य कक्षा में प्रविष्ट सभी छात्रों को छात्रावृत्ति पाने के लिए अंतिम पूर्व परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है।
  • छात्रवृत्ति वरीयता क्रम से स्वीकृत की जायेगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्धा एवं विकलांग छात्रें को आरक्षण नीति के अन्तर्गत निर्धारित प्रतिशत सीमा के अनुसार प्रत्येक कक्षा में छात्रवृत्ति देय होगी। परन्तु उन्हें छात्रवृत्ति पाने हेतु पूर्व परीक्षा में निर्धारित न्यूनतम अंक पाना अनिवार्य होगा। जैसे शास्त्री एवं आचार्य हेतु 40 प्रतिशत एवं शि0 शा0 एवं शि0 आ0 हेतु क्रमशः 45 एवं 50 प्रतिशत।
  • विद्यावरिधि में प्रविष्ट छात्रों के लिये छात्रावृत्ति विषयानुसार वरीयता क्रम से दी जायेगी जिसका निर्धारण शोध छात्रावृत्ति समिति के द्वारा किया जाएगा।
  • जिन छात्रों की पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष में छात्रावृत्ति स्वीकार की गई है उनको पाठ्यक्रम के अन्तिम वर्ष तक छात्रावृत्ति में प्राथमिकता दी जायेगी, यदि वे प्रत्येक वर्ष की परीक्षा के योग्यता क्रम में आएंगे। उनको एतदर्थ कम से कम 40 प्रतिशत अंक रखना अनिवार्य होगा किन्तु उन्हें भी नियमानुसार एतदर्थ आवेदन करना होगा।
  • छात्रावृत्तियाँ शेष हो तो द्वितीय या तृतीय वर्ष की कक्षाओं में प्रविष्ट उन छात्रों को भी छात्रावृत्ति दी जा सकती है, जिनको पूर्व वर्षों में छात्रावृत्ति न मिली हो।
  • छात्रावृत्तियों की स्वीकृति छात्रों द्वारा उत्तीर्ण परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर योग्यताक्रम से छात्रावृत्ति समिति की अनुशंसा पर की जायेगी।
  • सामान्यतया विद्यापीठ से द्वितीय विषय में आचार्य करने की अनुमति नहीं है। किन्तु विशेष स्थिति में प्राचीन न्याय, नव्यन्याय और अद्वैतवेदान्त आदि दुलर्भ विषयों में द्वितीय आचार्य करने की स्थिति में भी छात्रावृत्ति स्वीकृत की जा सकती है । ढध्सपझढध्नसझढध्जकझ
  • किन्हीं कारणवश छात्रावृत्ति निलंबित या निरस्त होने पर पुनः चालू करने हेतु कुलपति की स्वीकृति आवश्यक होगी।
3. छात्रावृत्तियों की संख्या
  • विद्यापीठ बजट में प्रावधान होने एवं पाठ्यक्रम के चलते रहने पर प्रति वर्ष निम्नलिखित संख्या में छात्रावृत्तियाँ उपलब्ध होगी।
  1. शास्त्री (बी.ए.) एवं शास्त्री           75 छात्रा एवं 75 छात्रावृत्तियाँ प्रतिवर्ष सम्मानित (बी.ए. आनर्स)
  2. शिक्षा शास्त्री (बी.एड्.)                  180 छात्रा एवं 60 छात्रावृत्तियाँ
  3. आचार्य (एम.ए.)                            15 छात्रा प्रति वर्ष प्रति विषय एवं 15
    छात्रावृत्तियाँ प्रतिवर्ष प्रतिविषय में
  4. शिक्षाचार्य (एम.एड्.)                       10 छात्रा एवं 10 छात्रावृत्तियाँ
  5. विद्यावारिधि(पीएच.डी.)                     20 छात्रावृत्तियाँ
नोटः
विद्यावारिधि में साहित्य, पुराणेतिहास, वेद, सिद्वान्तज्यो0, फ0ज्यो0, धर्मशास्त्रा, पौरोहित्य, सर्वदर्शन, सांख्ययोग, अद्वैतवेदान्त, विशिष्टाद्धैत, मीमांसा, नव्यन्याय, नव्यव्याकरण, प्राचीन न्याय वै0, जैनदर्शन,प्राकृत एवं शिक्षा विषयों में प्रत्येक विषय में एक-एक छात्रावृत्ति स्वीकृत की जाएगी। छात्रावृत्ति उपलब्ध रहने की स्थिति में वरीयता के आधार पर अन्य विषयों के छात्रों को भी स्वीकृत की जा सकती है।
4. छात्रावृत्ति प्रदान करने के नियम
  • अग्रिम वर्ष में छात्रावृति अच्छी शैक्षणिक प्रगति, अच्छे चरित्रा एवं नियमित उपस्थिति पर निर्भर होगी।
  • प्रथम वर्ष में प्रवेश प्राप्त एवं पाठ्यक्रम में उत्तीर्ण होकर द्वितीय, तृतीय वर्ष में प्रवेश प्राप्त छात्रों का प्रतिवर्ष छात्रावृत्ति के लिए चुनाव किया जाएगा। छात्रावृत्ति पाने वाले जिन छात्रों ने अपना पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है या किसी खण्ड में उत्तीर्ण हो चुके हैं, उनको अग्रिम वर्ष या अग्रिम कक्षा में छात्रावृत्ति योग्यता क्रम से ही प्रदान की जाएगी।
  • इन नियमों के अन्तर्गत किसी भी छात्रावृत्ति पाने वाले छात्रा को किसी अन्य स्थान से छात्रावृत्ति, वेतन या पारिश्रमिक प्राप्त करने की छूट नहीं होगी। अन्यत्रा से वृत्ति प्राप्त करने की स्थिति में विद्यापीठ से छात्रावृत्ति प्राप्त करने से पूर्व उसे वह वृत्ति छोड़नी होगी और यदि कोई धन प्राप्त किया हो तो वह वापस करना होगा, परन्तु वर्ष भर में प्राप्त छात्रावृत्ति की धनराशि के बराबर तक कोई नगद या किसी अन्य रूप में आकस्मिक पुरस्कार प्राप्त करने पर छात्रावृत्ति पाने के लिए अयोग्य नहीं होगा। इसी प्रकार छात्रों को विद्यापीठ द्वारा प्रदत्त निःशुल्क शिक्षा, छात्रावास, पुस्तकें एवं यातायात में सुविधा प्राप्त करने की अनुमति भी होगी।
  • विद्यापीठ के नियमित छात्रों को ही छात्रावृत्ति दी जाएगी।
  • जो छात्रा निष्क्रमण-प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं करेंगे, उन्हें छात्रावृत्ति के लिए अर्ह होने पर भी तब तक छात्रावृत्ति का भुगतान नहीं किया जाएगा, जब तक वे निष्क्रमण प्रमाण-पत्रा प्रस्तुत नहीं कर देते।
  • छात्रावृत्तियों की प्राप्ति और उनको जारी रखने के लिए प्रत्येक कक्षा में नियमानुसार उपस्थिति और विद्यापीठ के अनुशासन का सर्वथा पालन अनिवार्य शर्त होगी। अनुशासनहीनता की शिकायत प्राप्त होने पर छात्रावृति स्थगित या निरस्त की जा सकेगी।
  • उत्तम आचरण तथा उपस्थिति में नियमितता पाठ्यक्रम के मध्य छात्रावृत्ति को चालू करने की शर्ते हैं। किसी मास में किसी कक्षा में 75 प्रतिशत से कम उपस्थित होने वाले छात्रा को तब तक छात्रावृत्ति नहीं दी जाएगी, जब तक कि वह उपस्थिति की कमी को पूर्ण कर 75 प्रतिशत उपस्थिति नहीं कर लेता उपस्थिति नियम पूमर्णतः लागू होंगे।
  • 10 दिन से अधिक निरन्तर अनुपस्थिति रहने पर उस अवधि की छात्रावृत्ति निरस्त हो जाएगी, चाहे छात्रा की कुल उपस्थिति पूर्ण हो, ऐसे छात्रा को 10 माह ही अवधि में से अनुपस्थिति के समय को काटकर शेष समय की छात्रावृत्ति का ही भुगतान किया जाएगा।
  • एन.सी.सी./एन.एस.एस. शैक्षणिक एवं खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु विद्यापीठ द्वारा प्रेषित छात्रा को उस अवधि का कर्त्तव्यावकाश मिलेगा। परन्तु संकाय के माध्यम से इसकी पूर्व सूचना कार्यालय को देनी होगी।
5. छात्रावृत्ति की राशि
  • प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए छात्रावृत्ति की राशि वर्तमान में निम्नलिखित हैः-
  1. शास्त्री (बी.ए.) एवं शास्त्री (सम्मानित) (बी.ए. ऑनर्स) 200/- रु0 मासिक
  2. शिक्षाशास्त्री (बी.एड्.) 200/- रु0 मासिक
  3. आचार्य (एम. ए.) 250/- रु0 मासिक
  4. शिक्षाचार्य (एम. एड्.) 750/-रु0 वार्षिक पुस्तक क्रय आदि सहायता 250/- रु0 मासिक
  5. विद्यावारिधि (पी-एच.डी.) 600/- रु0 मासिक एवं 1000/-रु0 पुस्तक क्रय एवं 1000/-रु0 विविध व्यय के रूप में अनुदान।
  • वित्त समिति एवं कार्य परिषद् की स्वीकृति से छात्रावृत्ति नियमों, संख्या एवं राशि में समय-समय पर संशोधन किये जा सकते हैं।
6. छात्रावृत्ति के लिए चुनाव प्रक्रिया
  • प्रविष्ट छात्रा को छात्रावृत्ति प्राप्त करने के लिए निर्धारित आवेदन पत्रा भर कर विद्यापीठ कार्यालय में निर्धारित तिथि तक प्रस्तुत करना होगा। आवेदन-पत्रा प्राप्त होने पर छात्रावृत्ति प्रदान करने के लिए दिये गये नियमों के अन्तर्गत योग्यताक्रम से विद्यापीठ की छात्रावृत्ति समिति छात्रावृत्ति स्वीकार करेगी।
  • छात्रावृत्ति आवेदन-पत्र प्रवेश लेने के 10 दिन के अन्दर शैक्षणिक अनुभाग कार्यालय में जमा कराने होंगे।
  • छात्रावृत्ति आवेदन-पत्र प्रवेश लेने के 10 दिन के अन्दर शैक्षणिक अनुभाग कार्यालय में जमा कराने होंगे।
7. छात्रावृत्ति की अवधि
  • सामान्य छात्रावृत्ति की अवधि एक शैक्षणिक सत्रा (10 माह) के लिये होगी।
  • विद्यावारिधि के लिये छात्रावृत्ति की अवधि दो वर्ष (24 माह) के लिये होगी।
  • सत्रीय परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले छात्र की छात्रवृत्ति निरस्त कर दी जायेगी।
8. अवकाश स्वीकृति
  • सम्बन्धित संकाय प्रमुखों की पूर्व अनुमति से छात्रों द्वारा लिये गये निम्नलिखित अवकाशों को छात्रावृत्ति के लिए ‘‘अनुपस्थिति’’ में नहीं गिना जायेगा।
  • सम्बन्धित विभागाध्यक्ष की अनुशंसा पर बिना चिकित्सा प्रमाण-पत्र के एक शैक्षणिक सत्र में 10 दिन का अवकाश।
  • एक शैक्षणिक सत्रा में 10 दिन से अधिक चिकित्सकीय अवकाश जिसके लिये सरकारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा छात्रा की अस्वस्थता का प्रमाण पत्रा प्रस्तुत किया गया हो। (जिसमें हॉस्पीटल में प्रवेश तथा मुक्त होने का प्रमाण-पत्रा प्रंस्तुत किया गया हो)
  • चिकित्सकीय अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र अवकाश के प्रारम्भ में ही देना होगा तथा अवकाश की समाप्ति पर चिकित्सा प्रमाण-पत्र तथा स्वस्थता-प्रमाण पत्र देना चाहिए। बाद में दिये गये प्रार्थना-पत्र पर अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा तथा वह अवधि अनुपस्थिति में गिनी जायेगी।
  • शिक्षा शास्त्राी में प्रविष्ट छात्रों की उपस्थिति के संबंध में भी यह नियम लागू होंगे किन्तु प्रायोगिक प्रशिक्षण के समय शत-प्रतिशत उपस्थिति अपेक्षित है। इन छात्रों को पूरे सत्रा में अधिकतम 15 दिन का ही रुग्णतावकाश दिया जायेगा ।
9. छात्रावृत्ति भुगतान
  • सामान्यतः कुल उपस्थितियों के आधार पर सम्बन्धित समिति की अनुशंसा पर छात्रावृत्ति के भुगतान का आदेश प्रत्येक मास के प्रथम सप्ताह में विद्यापीठ विद्यापीठ द्वारा किया जाएगा। प्रवेश या कक्षा में उपस्थिति में से जो तिथि बाद की होगी, उसी तिथि से छात्रावृत्ति प्रारम्भ होगी।
विशेष
विद्यापीठ में समय -सम य पर होने वाले शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी सभी छात्रों का उपस्थित रहना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वाले तथा अनुचित आचरण करने वाले छात्रों को विद्यापीठ तथा छात्रावास से पृथक् कर दिया जायेगा और छात्रावृत्ति रोक दी जायेगी।
 
 
 
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