सर्वदर्शन विभाग

Head of Department Dean of the Faculty

प्रो. प्रभाकर प्रसाद
प्रोफेसर, सर्वदर्शन विभाग

सर्वदर्शन दर्शनशास्त्र का सर्वाधिक अध्ययन कराने वाला शास्त्र है। दर्शन का लक्ष्य निःश्रेयस् की प्राप्ति है। व्यक्ति का परम-लक्ष्य भौतिक भी हो सकता है, आध्यात्मिक भी। दर्शनशास्त्र दोनों मार्गों का औचित्य बतलाते हुए कर्तव्याकर्तव्य, शुभाशुभ का दिशाबोध कराता है । अतः व्यक्ति के भौतिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिये महत्त्वपूर्ण है ।

भारतीय दर्शन का आरम्भ वेदों से होता है, इसका उत्कर्ष उपनिषदों में मिलता है । कालान्तर में यथार्थ तत्त्व को अलग-अलग विश्लेषण के आधार पर समझाने की प्रक्रिया में सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा, वेदान्त- इन षड्दर्शनों का एवं चार्वाक, जैन, बौद्ध, शैवादि दर्शन का अभ्युदय हुआ । इन सभी दर्शनों ने अपने-अपने विचारों को सूत्र-शैली में प्रस्तुत किया, जो तत्तत् दर्शनों के सूत्र-ग्रन्थों के नाम, जैसे- साघ्ख्यसूत्र, योगसूत्र, न्यायसूत्र, मीमांसासूत्र आदि से प्रसिद्ध हैं । सर्वदर्शन विषय में इन सभी दर्शनों का अध्ययन उनके आधारभूत सूत्रग्रन्थों एवं भाष्यग्रन्थों के माध्यम से करवाया जाता है । साथ ही समकालीन-दर्शन एवं पाश्चात्य दर्शन का संक्षिप्त-ज्ञान भी दिया जाता है।

अध्ययन सामग्री / संदर्भ

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संकाय विवरण

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क्रमांक फ़ोटो नाम विभाग पद
1 संगीता खन्ना प्रो. संगीता खन्ना सर्वदर्शन विभाग प्रोफेसर
2 प्रभाकर प्रसाद प्रो. प्रभाकर प्रसाद सर्वदर्शन विभाग प्रोफेसर
3 जवाहर लाल प्रो. जवाहर लाल सर्वदर्शन विभाग प्रोफेसर
4 विजय गुप्ता डॉ विजय गुप्ता सर्वदर्शन विभाग असिस्टेंट प्रोफेसर