वेद विभाग

Head of Department Dean of the Faculty

प्रो. रामानुज उपाध्याय
प्रोफेसर, वेद विभाग

भारत की राजधानी दिल्ली में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (मानित-विश्वविद्यालय), नई-दिल्ली-16, जो अब श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) के नाम से जाना जाता है | इसकी स्थापना संस्कृत तथा संस्कृति के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण हेतु की गई थी। उस दिशा में विद्यापीठ स्थापना (१९७१ ई.) से लेकर आजतक निरन्तर कटिबद्ध होकर प्रगतिपथ पर आरूढ़ है।

इस विश्वविद्यालय में वेद-वेदाङ्ग के साथ बीस विषयों में अनेक छात्र अध्ययनरत हैं। वेद विश्व साहित्य का प्राचीनतम ग्रन्थ है। वेद एवं वैदिक-संस्कृति ये दोनों भारत की अस्मितास्वरूप हैं। अतः वेदों की रक्षा की दृष्टि से विश्वविद्यालय में वेदाध्ययन की विशेष व्यवस्था है। समस्त वैदिक-वाङ्मय मुख्य रूप से तीन धाराओं में विभाजित हैं।

  1. अक्षरग्रहण
  2. अर्थानुशीलन
  3. प्रयोग।

अक्षरग्रहण- से तात्पर्य है पारम्परिक रीति से सस्वर वेदमन्त्रें का अभ्यास करना।

अर्थानुशीलन- वेदमन्त्रों में निहित अर्थो को निरुक्त, व्याकरण, ब्राह्मण तथा मीमांसा ग्रन्थों की सहायता से प्रतिपादित कना तथा योगक्षेम हेतु मार्गदर्शन कराना।

प्रयोग-यह पक्ष बहुत ही व्यापक तथा गहन है। ऋषियों ने प्रकृति में होने वाले समस्त गतिविधियों का विधिवत् अध्ययन कर तदनुरूप विविध यज्ञानुष्ठानों का प्रतिपादन किया है, जो प्रकृति में होनेवाले प्रत्येक उपद्रवों का उपशमन करने में पूर्णतः समर्थ है। एतदर्थ ऋषिसम्मत मार्ग श्रौत-स्मार्त अनुष्ठान है, जिसका सूत्र रूप में श्रौतसूत्र, गृह्यसूत्र एवं विधानसूत्रों में सविधि निरूपण किया गया है।

उपर्युक्त तीनों धाराओं के सरंक्षण की दिशा में विश्वविद्यालयीय वेद विभाग सतत प्रयत्नशील है। विभाग में समय-समय पर विभिन्न विषयों पर व्याख्यानमाला, वैदिकसम्मेलन, तथा प्रयोगानुष्ठान किया जाता है। इस विषय में यह उल्लेखनीय है कि 6 जनवरी 1996 को विद्यापीठ (विश्वविद्यालय) परिसर में तत्कालीन कुलपति स्व. प्रो. वाचस्पति उपाध्याय के सान्निध्य में पौर्णमासेष्टि का सफल अनुष्ठान किया गया, जिसे देखने के लिए भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आचार्य एवं जिज्ञासु छात्र उपस्थित हुए थे। विभागीय छात्रों के ज्ञान संवर्धन हेतु मासिक धीवर्द्धिनी सभा का आयोजन किया जाता है | विभागीय अध्यापकगण छात्रों को यथासम्भव प्रत्येक विषय में प्रवीणता के लिये उपयुक्त मार्गदर्शन करते रहते हैं |

अध्ययन सामग्री / संदर्भ

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क्रमांकशीर्षकडाउनलोड
1इश्टि विवरणडाउनलोड (749.24 KB) pdf
2यज्ञपात्रों का परिचयडाउनलोड (97.65 KB) pdf
3यज्ञपात्र 1-10डाउनलोड (52.45 KB) pdf
4यज्ञपात्र 11-20डाउनलोड (51.56 KB) pdf
5यज्ञपात्र 21-28डाउनलोड (62.84 KB) pdf
6यज्ञपात्र 29-34डाउनलोड (47.71 KB) pdf
7यज्ञपात्र 35-36(रथ और शकट)डाउनलोड (48.42 KB) pdf
8यज्ञपात्र 37-40डाउनलोड (35.01 KB) pdf
9यज्ञपात्र 41-46डाउनलोड (32.97 KB) pdf
10यज्ञपात्र 47-55डाउनलोड (46.98 KB) pdf
11यज्ञपात्र 56-60डाउनलोड (38.6 KB) pdf
12अग्निष्टोमः वेदींडाउनलोड (77.44 KB) pdf
13प्रस्तार-1डाउनलोड (73.44 KB) pdf
14प्रस्तार-2डाउनलोड (90.35 KB) pdf
15प्रस्तार-3डाउनलोड (67.86 KB) pdf
16प्रस्तार-4डाउनलोड (81.99 KB) pdf
17प्रस्तार-5डाउनलोड (95.01 KB) pdf

संकाय विवरण

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क्रमांक फ़ोटो नाम विभाग पद
1 गोपाल प्रसाद शर्मा प्रो. गोपाल प्रसाद शर्मा वेद विभाग प्रोफेसर
2 रामानुज उपाध्याय प्रो. रामानुज उपाध्याय वेद विभाग प्रोफेसर
3 देवेन्द्र प्रसाद मिश्र डॉ देवेन्द्र प्रसाद मिश्र वेद विभाग एसोसिएट प्रोफेसर
4 सुंदर नारायण झा डॉ सुंदर नारायण झा वेद विभाग एसोसिएट प्रोफेसर
5 हनुमान मिश्र डॉ हनुमान मिश्र वेद विभाग एसोसिएट प्रोफेसर